
भारतीय सिनेमा को आकार देने वाले दिग्गजों की बात जब भी होती है, सलीम खान का नाम सबसे ऊपर आता है। आज बहुत-से लोग उन्हें सुपरस्टार सलमान खान के पिता के रूप में जानते हैं, लेकिन सलीम खान की खुद की बॉलीवुड यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वे उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में से एक हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा की भाषा, अंदाज़ और कहानी कहने के तरीके को एक नई दिशा दी और कहानी लेखन के लिए नए मानक स्थापित किए।
24 नवंबर 1935 को इंदौर में जन्मे सलीम खान ऐसे माहौल में पले-बढ़े जहाँ कहानियों की कद्र की जाती थी और संस्कृति का सम्मान किया जाता था। उन्हें भावनाओं, चरित्रों और मानव स्वभाव को समझने की एक अनोखी क्षमता थी—एक ऐसा गुण जिसने आगे चलकर उन्हें वह लेखक बनाया जिसकी कल्पना बॉलीवुड ने पहले कभी नहीं की थी।
सलीम खान का सफर एक लेखक के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिनेता बनने के सपने से शुरू हुआ। 1960 के दशक में वे कुछ फिल्मों में दिखाई भी दिए, लेकिन उनका अभिनय करियर कभी खास ऊँचाइयों तक नहीं पहुँचा। इसके विपरीत, उनकी सोच की स्पष्टता, संवाद की समझ और कहानी के ढाँचे को पकड़ने की कला लोगों को जल्दी ही प्रभावित करने लगी।
यही प्रतिभा तब और चमक उठी जब उन्होंने एक और उभरते लेखक जावेद अख्तर के साथ हाथ मिलाया। साथ मिलकर उन्होंने भारतीय सिनेमा का सबसे सफल और ऐतिहासिक लेखन-जोड़ी—सलीम–जावेद—का निर्माण किया।
सलीम–जावेद के आने से पहले बॉलीवुड में रोमांस और पारिवारिक ड्रामे का बोलबाला था। लेकिन इस जोड़ी ने फिल्मों में नई तीव्रता, नया स्टाइल और ज़मीनी यथार्थ लेकर आए। उनके लिखे किरदार, दृश्यों और संवादों में वह दम था जिसने दर्शकों को पहली बार किसी कहानी से भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर जोड़ा।
उन्होंने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दीं, जैसे:
ज़ंजीर – जिसने बॉलीवुड को “एंग्री यंग मैन” दिया
दीवार – दो भाइयों की भावनात्मक टकराव वाली कालजयी फिल्म
शोले – जो आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी क्लासिक मानी जाती है
डॉन, काला पत्थर, त्रिशूल, शक्ति और कई अन्य
इन फिल्मों ने न केवल सफलता पाई बल्कि 70 और 80 के दशक के बॉलीवुड की पहचान ही बदल दी। अमिताभ बच्चन के करियर की नींव रखने में भी सलीम खान का बड़ा योगदान माना जाता है।
सलीम खान में यह अनोखी क्षमता थी कि वे लोगों की भाषा, उनका व्यवहार और उनके भावों को बेहद सहजता से समझ लेते थे। उनके संवाद सीधे दिल पर असर करते थे। चाहे एक्शन सीन हो या भावुक पल, उनके लिखे शब्द हमेशा सच्चे और प्रभावशाली लगते हैं।
उनके किरदार कभी एक-आयामी नहीं होते थे। वे इंसानों की तरह कमजोर, मजबूत, जटिल और वास्तविक होते थे। आज भी उनकी कई फिल्मों के संवाद इसलिए दोहराए जाते हैं क्योंकि वे संवेदना को बिल्कुल सटीक ढंग से पकड़ लेते हैं।
1980 के दशक में यह प्रसिद्ध जोड़ी भले ही टूट गई, लेकिन सलीम खान ने अपनी रचनात्मक यात्रा जारी रखी। उन्होंने नाम, कब्ज़ा, अकेला जैसी फिल्मों में योगदान दिया और खुद को एक मजबूत स्वतंत्र लेखक के रूप में स्थापित रखा।
भले ही बॉलीवुड में समय के साथ नई विधाएँ और नए प्रयोग आने लगे, लेकिन सलीम खान की लेखन शैली—जो मानव भावनाओं की गहराई को छूती है—हमेशा प्रासंगिक बनी रही।
फिल्मी दुनिया से बाहर भी सलीम खान एक सम्मानित व्यक्तित्व हैं। वे बॉलीवुड के सबसे चर्चित और प्रभावशाली परिवारों में से एक—खान परिवार—के मुखिया हैं। उनके बेटे सलमान खान, अरबाज़ खान और सोहेल खान फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बना चुके हैं।
सलमान खान कई बार बताते हैं कि उनके पिता के सिद्धांतों, सादगी और मेहनत ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। सलीम खान अपनी सादगी, ईमानदारी और समझदारी के लिए जाने जाते हैं, जिसने उन्हें पूरी इंडस्ट्री में सम्मान दिलाया।
सलीम खान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनका काम समय के साथ भी अपनी चमक नहीं खोता। दशकों बीत जाने के बाद भी उनकी फिल्में नए दर्शकों को आकर्षित करती हैं, नए फिल्मनिर्माताओं को प्रेरित करती हैं और कलाकारों को दिशा देती हैं।
उन्होंने मसाला फिल्मों के उस फॉर्मेट को आकार दिया जिसमें एक ही कहानी में ड्रामा, एक्शन, रोमांस और भावनाएँ होती हैं—और यही आज भी हिंदी सिनेमा की रीढ़ है। उन्होंने यह साबित किया कि मजबूत लेखन किसी भी फिल्म को ऐतिहासिक बना सकता है और एक चरित्र को अमर कर सकता है।
सलीम खान के योगदान को सिर्फ पुरस्कारों या आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। उनकी असली उपलब्धि वे दिल हैं जिन्हें उन्होंने अपनी कहानियों से छुआ है, और वे फिल्मकार हैं जो आज भी उसी रास्ते पर चलकर नया इतिहास लिख रहे हैं।
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बप्पी लाहिड़ी, जिन्हें प्यार से बप्पी दा कहा जाता है, भारतीय संगीत इतिहास के सबसे प्रभावशाली और नवोन्मेषी संगीतकारों में से एक हैं। अपने पाँच दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने बॉलीवुड को एक ऐसा आधुनिक, चंचल और ऊर्जा से भरा संगीत दिया, जिसे भारत ने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। उनके गीत बदलते हुए भारत की उस धड़कन को पकड़ते थे, जो अधिक जीवंत, युवा और वैश्विक प्रभावों को अपनाने के लिए तैयार हो रहा था। आज भी, उनके निधन के वर्षों बाद, उनकी धुनें पीढ़ियों तक गूंजती हैं, जो उनकी प्रतिभा की अमरता साबित करती हैं।
भारतीय सिनेमा की विशाल और जीवंत दुनिया में कुछ ही सितारे उतने दीर्घकालिक और उज्ज्वल चमके हैं जितने धर्मेंद्र जिन्हें प्यार से बॉलीवुड का ही-मैन कहा जाता है। कई दशकों तक उन्होंने केवल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक भावना, एक युग और अपने आप में एक संस्था के रूप में स्थान बनाया। छोटे शहर का एक सपने देखने वाला युवा जब इतिहास के सबसे प्रिय और सम्मानित सितारों में से एक बन गया, तो वह यात्रा समर्पण, विनम्रता और अद्वितीय प्रतिभा की मिसाल बन गई। पीढ़ियाँ आईं और चली गईं, पर धर्मेंद्र का आकर्षण कभी फीका नहीं पड़ा वह आज भी उतना ही उज्ज्वल है।
भारतीय सिनेमा के विशाल इतिहास में कुछ ही सितारे ऐसे हैं जो हेलेन जितनी चमक और विशिष्टता लेकर आए हों—वह कलाकार जिसने ग्लैमर, नृत्य और स्क्रीन प्रेज़ेंस की परिभाषा ही बदल दी। बॉलीवुड की मूल ‘कैबरे क्वीन’ कही जाने वाली हेलेन सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि एक युग थीं। संघर्ष करते हुए एक प्रवासी लड़की से भारतीय सिनेमा की सबसे पहचानने योग्य चेहरों में शामिल होना—यह उनकी प्रतिभा, दृढ़ता और चुंबकीय व्यक्तित्व का प्रमाण है। आज, दशकों बाद भी, जब वे परदे से दूर हैं, हेलेन एक अदम्य सांस्कृतिक प्रतीक बनी हुई हैं।
हर साल 22 नवंबर को दुनिया भर के लाखों प्रशंसक एकत्रित होकर बॉलीवुड के सबसे प्रिय और बैंकेबल स्टार कार्तिक आर्यन का जन्मदिन मनाते हैं। ईमानदारी, कड़ी मेहनत और आकर्षक ऑन-स्क्रीन व्यक्तित्व से सजी उनकी फिल्मी यात्रा ने उन्हें युवा महत्वाकांक्षा, मध्यमवर्गीय दृढ़ता और सिनेमा की मोहक दुनिया का प्रतीक बना दिया है।
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